Monday, April 6, 2026

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जॉब छोड़ सफल उद्यमी बने 31 वर्षीय युवा हर्षल लांडे

सफलता की कहानी

पीएमएफएमई योजना से जिले के युवा उद्यमी हर्षल के सपनों को मिली ऊंचाइयॉ

जॉब छोड़ सफल उद्यमी बने 31 वर्षीय युवा हर्षल लांडे

मात्र 6 महिनों में 35 लाख का टर्नओवर, दे रहे है ओरों को भी रोजगार

बुरहानपुर/09 अक्टूबर, 2025/- प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) भारत सरकार द्वारा सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को वित्तीय, तकनीकी और विपणन सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है। यह योजना सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को पूंजीगत सब्सिडी प्रदान करती है। इससे छोटे उद्यमियों को अपनी इकाईयां स्थापित करने एवं विस्तार करने में मदद मिलती है।

मध्यप्रदेश में युवा उद्यमिता को प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार इस योजना को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सक्रिय प्रोत्साहन और समर्थन से राज्य में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र विकास की ओर बढ़ रहा है। सरकार द्वारा प्रदान की जा रही अनुदान योजनाएँ, रियायती ऋण सुविधाएँ युवाओं के लिए व्यापार शुरू करने की प्रक्रिया को सरल और सुगम बना रही हैं। मध्यप्रदेश सरकार युवाओं के उद्यम और नवाचार को बल देकर, उनके सपनों को नई ऊँचाई दे रही है। आज के युवा केवल अच्छी नौकरी की तलाश में नहीं हैं, बल्कि कुछ नया करने की इच्छाशक्ति भी रखते है।

जिले के युवा उद्यमी ने बनायी नई पहचान
ऐसी ही एक कहानी साझा की है बुरहानपुर जिले के शाहपुर में रहने वाले प्रगतिशील उद्यमी हर्षल लांडे ने। यह कहानी पीएमएफएमई योजना से लाभान्वित युवा की है जो अन्य युवाओं के लिये प्रेरणास्त्रोत है। हर्षल लांडे ने अपनी पढ़ाई वेलिंगकर कॉलेज, मुंबई से एमबीए करके पूरी की उसके बाद उन्‍होंने करीबन पाँच साल एक बड़ी मल्टी नेशनल कंपनी में आईटी कंसल्टेंट के तौर पर काम किया।

वे कहते है कि, सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था, अच्छी सैलरी, आरामदायक जिंदगी और एक सुरक्षित करियर, लेकिन अंदर से हमेशा एक सवाल उठता था क्या मैं वही कर रहा हूँ जो मुझे सच में करना चाहिए। हर्षल बताते है कि, वे एक किसान परिवार से आते है, उनकेे पिता खेती और कृषि व्यवसाय से जुड़े है। बचपन से ही हर्षल ने खेतों में मेहनत, मिट्टी की खुशबू और फसल की खुशी को करीब से महसूस की है।

इसी सोच के साथ युवा उद्यमी हर्षल ने अपनी नौकरी छोड़कर पोस्ट-हार्वेस्ट सेक्टर में कदम रखा। बुरहानपुर जिले में केला मुख्य फसल है और इस फसल में अपार संभावनाएं हैं, बस जरूरत थी सही दिशा मिलने की।

ब्रांड “Snikks” की शुरूआत
कभी मुंबई के कॉर्पाेरेट गलियारों में अपनी पहचान बनाने वाले हर्षल ने अपनी जॉब छोड़कर एक नया सपना देखा, अपने गाँव की मिट्टी से जुड़कर खुद का व्यवसाय खड़ा करने का। युवा उद्यमी हर्षल के इस सपने को नये पंख पीएमएफएमई योजना से मिले। योजना अंतर्गत मिली राशि से शाहपुर में केला चिप्स यूनिट की स्थापित की। यही से ब्रांड “Snikks” की शुरूआत हुई।

मात्र छह महीनों में 35 लाख रुपये का टर्नओवर
युवा उद्यमी हर्षल बताते है कि, एक ऐसा ब्रांड जो 100 प्रतिशत राइस ब्रान ऑयल में तले हुए केले के चिप्स बनाता है। यह हमारे उत्पाद की विशेषता है, क्योंकि राइस ब्रान ऑयल न केवल हेल्दी है, बल्कि चिप्स को हल्का और क्रिस्पी भी बनाता है। सिर्फ छह महीनों में 35 लाख रुपये का टर्नओवर हासिल किया है और औसतन हर महीने एक लाख रुपये तक का मुनाफा कमा रहा हूँ।

यह सफर आसान नहीं था, लेकिन हर दिन एक नई सीख लेकर आया। हर्षल कहते है कि, मेरे लिए “Snikks” सिर्फ एक बिज़नेस नहीं, बल्कि किसानों से जुड़ा एक मिशन है। वे अपने इस व्यवसाय को और आगे बढ़ाना चाहते है। केले से जुड़ी नई फूड प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी को अपनाने ताकि, और अधिक वैल्यू-ऐडेड प्रोडक्ट्स बना सकें।

केला चिप्स यूनिट में तैयार प्रोडक्ट्स सिर्फ मध्यप्रदेश राज्य में ही नहीं बल्कि इनका स्वाद रायपुर, हैदराबाद, पुणे, मुंबई और बैंगलुरु जैसे बड़े-बड़े शहरों तक भी पहुंच चुका है।

योजना से मिली दिशा, मेहनत लायी रंग
इस सफलता की नींव में शासन का महत्वपूर्ण योगदान है। उद्यानिकी विभाग के सहयोग से लाभार्थी हर्षल लांडे को यूनिट स्थापना के लिये पीएमएफएमई योजना के तहत 10 लाख रुपये का अनुदान मिला, इससे केला चिप्स यूनिट स्थापना में मदद मिली।

स्वाद और रोजगार का संगम
31 वर्षीय युवा उद्यमी हर्षल आज एक सफल उद्यमी के रूप में अन्य लोगों को भी रोजगार देने में सक्षम बन पाये है। केला चिप्स यूनिट में करीबन 10 लोगों को रोजगार मिल रहा है। यूनिट में रेगुलर, टोमेटो, पेरी-पेरी, क्रीम ओनियन, सॉल्टेड और पुदीना आदि 6 प्रकार के फ्लेवर्स के चिप्स बनाये जाते है।

सपनों को बदला हकीकत में
प्रदेश के युवाओं में अपार प्रतिभाएं है यदि उन्हें सही दिशा एवं अवसर मिले तो वे उँचाइयों तक पहुँच सकते है। यह कहानी आत्मनिर्भर भारत की पहचान है।

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