Wednesday, May 27, 2026

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बरगी बांध हादसा—संवेदनाओं से नहीं, व्यवस्था से बचती हैं जानें


“बरगी बांध हादसा—संवेदनाओं से नहीं, व्यवस्था से बचती हैं जानें

बुरहानपुर। जबलपुर स्थित बरगी बांध पर हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। पर्यटकों से भरा क्रूज अचानक डूब गया, जिसमें सवार कई लोगों की दुखद मृत्यु हो गई। यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि हमारी लापरवाह व्यवस्था का गंभीर उदाहरण है।

ताप्ती सेवा समिति, बुरहानपुर द्वारा इस दुखद घटना में मृतकों को श्रद्धांजलि दी गई। समिति के सदस्यों ने शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की और पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की।

इस हादसे के दौरान सामने आए दृश्य अत्यंत मर्मस्पर्शी हैं। बचाव कार्य के दौरान एक मां का शव मिला, जो अपने छोटे बेटे को सीने से लगाए हुए थी—यह दृश्य पूरे समाज को भीतर तक झकझोर देने वाला है।

समिति का मानना है कि यह दुर्घटना केवल एक प्राकृतिक या आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि व्यवस्थागत विफलता का परिणाम है। जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वह कोई दूरस्थ क्षेत्र नहीं है, इसके बावजूद समय पर प्रभावी बचाव दल और संसाधन उपलब्ध नहीं हो सके। जब हर पल महत्वपूर्ण था, तब तंत्र की धीमी प्रतिक्रिया ने कई जिंदगियों को बचने का अवसर ही नहीं दिया।

यह प्रश्न उठता है कि ऐसी पर्यटन गतिविधियों में सुरक्षा के मानक आखिर कितने गंभीरता से लागू किए जाते हैं? क्या लाइफ जैकेट और आपातकालीन व्यवस्था केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं? हादसे के समय तत्काल सक्रिय होने वाली रेस्क्यू टीम कहां थी?

ताप्ती सेवा समिति शासन-प्रशासन से मांग करती है कि:

सभी जल पर्यटन स्थलों पर सख्त सुरक्षा मानकों को अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।

प्रत्येक क्रूज और नाव में पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

आपात स्थिति में तुरंत कार्य करने वाली रेस्क्यू टीम और आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

इस घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

केवल संवेदना व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है। जब तक व्यवस्था जवाबदेही तय नहीं करती, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी। जिन परिवारों ने अपने अपनों को खोया है, उनके लिए यह पीड़ा जीवनभर का घाव बन जाती है।

ताप्ती सेवा समिति सभी दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करती है और शासन से अपेक्षा करती है कि वह इस घटना से सबक लेते हुए ठोस और प्रभावी कदम उठाए।

“संवेदनाएं तब सार्थक होती हैं, जब वे व्यवस्था में बदलाव लाएं।”
इस अवसर पर समिति अध्यक्ष सरिता भगत कविता चौहान बसंती बाई यादव फुनो यादव श्री किशन चौहान अजय राठौर पुनीत साकले भूपेंद्र जूनागढे विनय पुनीवाला मनोज कानूगो मनोज गुप्ता विवेक हकीम आदि लोग मौजूद थे

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