बुरहानपुर

अहंकार को खोकर विनय को करें वेलकम, यही है मार्दव धर्म – 108 मुनिश्री कुंथसागर जी महाराज

अहंकार को खोकर विनय को करें वेलकम, यही है मार्दव धर्म – 108 मुनिश्री कुंथसागर जी महाराज
बुरहानपुर नि.प्र. – मुनिश्री ने कहा कि “अहंकार को गो करो, विनय को वेलकम करो, यही मार्दव धर्म है।” उन्होंने कहा कि अहंकार समाज का सबसे बड़ा माइनस पॉइंट है । ‘मैं, मैं’ ही सबसे बड़ा अहंकार है । हमें ‘मैं’ को छोड़कर ‘हम’ की भावना के साथ सभी को साथ लेकर चलना चाहिए । उक्त उदगार परम पूज्य मुनिश्री 108 कुंथसागर जी महाराज के सानिध्य में आयोजित धार्मिक ध्यान शिविर में उत्तम मार्दव धर्म पर प्रवचन देते हुए आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर इंदिरा कॉलोनी में व्यक्त किये । मुनिश्री ने विनय का महत्व समझाते हुए कहा कि अदब सीखना है तो कलम से सीखो । कलम जब भी चलती है, वह झुककर ही चलती है। इसी कलम से इतिहास और ग्रंथ लिखे जाते हैं। उन्होंने कहा कि झुकने का नाम ही विनय है और यही मार्दव धर्म है ।
धार्मिक शिविर के दौरान तीनों वेदियों में तीर्थंकर भगवान के अभिषेक का सौभाग्य मुकेश महावीर ठोल्या, भागचंद गंगवाल निमाज वाले एवं जयेश प्रमोद बड़जात्या को प्राप्त हुआ । तीनों ने अलग-अलग वेदियों में प्रथम कलश करने का सौभाग्य प्राप्त किया। वहीं शांतिधारा करने का सौभाग्य मुकेश ठोल्या, विमल पाटनी, विशाल बाकलीवाल, चेतन सेठी, भागचंद जी गंगवाल निमाज वाले, शांतिलाल जी ठोलिया, संदेश जैन, अजय बड़जात्या, जयेश बड़जात्या एवं दिलीप कासलीवाल को प्राप्त हुआ। तत्पश्चात भगवान का पूजन एवं गुरु पूजन किया गया, जिसमें समाज के सभी लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया । यह जानकारी प्रमोद जैन बड़जात्या एवं महेंद्र जैन लूहाड़िया द्वारा दी गई ।
सलग्न छायाचित्र

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