बुरहानपुर में अखंड दीप जन्म शताब्दी 2026: 10,000 पीले वस्त्रधारियों और वीरांगनाओं की भव्य शोभायात्रा से गूंजा शहर, 24 स्थानों पर प्रज्वलित हुए दीपबुरहानपुर:

बुरहानपुर में अखंड दीप जन्म शताब्दी 2026: 10,000 पीले वस्त्रधारियों और वीरांगनाओं की भव्य शोभायात्रा से गूंजा शहर, 24 स्थानों पर प्रज्वलित हुए दीप
बुरहानपुर:
शान्तिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में परम वंदनीय माताजी एवं अखंड दीप की जन्म शताब्दी (2026) के पावन उपलक्ष्य में बुरहानपुर शहर में एक अद्भुत, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महाआयोजन संपन्न हुआ। ‘गृह-गृह गणेश गायत्री महायज्ञ’ की पूर्व संध्या एवं पूर्वान्ह पर आयोजित इस विशाल जन-जागरण अभियान ने पूरे शहर में आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक बदलाव की अलख जगाई, जिसमें करीब 10,000 की संख्या में पीले वस्त्रों में सुसज्जित जनसमूह ने भाग लेकर पूरे शहर को भक्तिमय बना दिया।
कन्या पूजन और भव्य शुभारंभ
कार्यक्रम के आरंभ में शहर के विभिन्न सामाजिक संगठनों ब शर के महापौर श्री माधुरी बैठ पटेल और सांसद महोदय श्री ज्ञानेश्वर पाटिल के सक्रिय सहयोग से भव्य कन्या पूजन और कन्या भोज का आयोजन किया गया। इसके उपरांत, गणपति नाका स्थित गणेश मंदिर से संत समाज के कर-कमलों द्वारा हरी झंडी दिखाकर विशाल ‘वीरांगना शोभायात्रा’ को रवाना किया गया। इस महाअभियान में 3600 कन्याओं और 1200 बाल पुरोहितों सहित लगभग 7000 नागरिकों ने अभूतपूर्व सहभागिता दर्ज कराई।
रथ, घोड़े, बैंड और झाँसी की रानी की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र
यह शोभायात्रा साहस, संस्कृति और अनुशासन का अनूठा संगम थी।
यात्रा में सज-धज कर चल रहे रथ, भव्य घोड़ों और गूंजते हुए बैंड-बाजों की धुनों ने पूरे वातावरण को ऊर्जावान बना दिया।
यात्रा में राष्ट्रमाता झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई और देश की अन्य महान वीरांगनाओं की सजीव व आकर्षक झांकियां सजाई गई थीं, जिन्हें देखकर हर किसी में देशभक्ति का ज्वार उमड़ पड़ा।
इसके अतिरिक्त, बुलेट चलाती हुई आत्मविश्वासी कन्याएं भी आकर्षण का मुख्य केंद्र रहीं।
पुष्प वर्षा से हुआ भव्य स्वागत
गणपति मंदिर से प्रारंभ होकर यह यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी। मार्ग में जगह-जगह विभिन्न गणेश मंडलों, व्यापारिक संगठनों और नागरिकों द्वारा पुष्प वर्षा कर इस विशाल जन-सैलाब का भव्य स्वागत किया गया। पीताम्बरी (पीले वस्त्र) रंग में रंगा जनसमूह जिधर से भी गुजरा, पूरा शहर “जय भारत” और गायत्री मंत्रों से गूंज उठा।
गायत्री परिवार के ‘सप्त आंदोलनों’ का संदेश
यह वीरांगना शोभायात्रा शांतिकुंज हरिद्वार के सात प्रमुख सामाजिक आंदोलनों को घर-घर पहुँचाने के लिए निकाली गई थी:
साधना आंदोलन: आत्म-परिष्करण और उपासना।
स्वास्थ्य आंदोलन: योग, प्राकृतिक चिकित्सा और यज्ञीय चिकित्सा।
शिक्षा आंदोलन: बाल संस्कार शाला और बौद्धिक क्रांति।
स्वावलंबन आंदोलन: स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता।
पर्यावरण संरक्षण आंदोलन: वृक्षारोपण, स्वच्छता और जल संरक्षण।
नारी जागरण आंदोलन: महिलाओं का सशक्तिकरण और नेतृत्व।
व्यसन मुक्ति व कुरीति उन्मूलन: समाज को नशामुक्त और रूढ़ियों से मुक्त करना।
. ‘हम सुधरेंगे – युग सुधरेगा’ के नारे और गुजर भवन पर साधना
पीले वस्त्रों में सुसज्जित कन्याओं, बाल पुरोहितों और हजारों नागरिकों ने हाथों में तिरंगा थामे हुए “हम सुधरेंगे युग सुधरेगा, हम बदलेंगे युग बदलेगा”, “नारी का सम्मान, देश का उत्थान” और “भारत माता की जय” के गगनभेदी नारे लगाए। जन-जागरण का यह कारवां शहर के विभिन्न मार्गों से होता हुआ गुजर भवन पर पहुंचा, जहां संध्या के समय सामूहिक साधना संपन्न हुई और उसके उपरांत सभी ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया।
24 स्थानों पर दीप यज्ञ से जगमगा उठा पूरा शहर
सामूहिक साधना और प्रसाद के पश्चात, इस भव्य आयोजन के अंतिम चरण में शहर के मुख्य 24 स्थानों पर भव्य दीप यज्ञ का आयोजन किया गया। दीपों की इस दिव्य रोशनी से पूरा बुरहानपुर शहर जगमगा उठा और अलौकिक छटा बिखेरने लगा।
इस विराट और अनुशासित आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि बुरहानपुर की पावन भूमि पर संस्कार, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति की जड़ें कितनी गहरी हैं।



