Wednesday, February 4, 2026

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जनजाति समाज प्रकृति पूजक, श्रेष्ठ जीवन मूल्यों और आध्यात्मिक परंपराओं के साथ भारतीय सभ्यता का अभिन्न अंग-अर्चना चिटनिस

जनजाति समाज प्रकृति पूजक, श्रेष्ठ जीवन मूल्यों और आध्यात्मिक परंपराओं के साथ भारतीय सभ्यता का अभिन्न अंग-अर्चना चिटनिस
बुरहानपुर। जनजातीय समाज अपनी विशेष संस्कृति, प्रकृति पूजा, श्रेष्ठ जीवन मूल्यों और आध्यात्मिक परंपराओं के साथ सदैव भारतीय सभ्यता और सनातन संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है। जब-जब देश की रक्षा, सुरक्षा का मामला आया तो जनजाति समाज ने आगे आकर राष्ट्र की रक्षा हेतु बलिदान दिया। भगवान बिरसा मुंडा, डेलन शाह, महुआ कोल, रघनाथसिंह मंडलोई, रणमतसिंह, भीमा नायक, टं्टया मामा, खाज्या नायक, राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह, बिरसा मुंडा ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अगवाई की। अंग्रेजों ने 1876 में भीमा नायक को काला पानी की सजा दी तो रघुनाथ मंडलोई ने 1857 की क्रांति में मालवा का नेतृत्व किया। अपने निमाड़ से भीमा नायक, टंट्या मामा आदि जनजाति समाज के युवाओं ने देश को आजाद कराने के लिए अपनी शहीदी देकर समाज को स्वतंत्रता हेतु संघर्ष की दिशा दी। जिनमें भगवान बिरसा मुंडा ने मात्र 13 वर्ष की आयु में अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोलकर 25 वर्ष की आयु में राष्ट्र रक्षा हेतु अपना बलिदान दिया। वे केवल जंगल या जमीन का संघर्ष नहीं वरन् स्वधर्म, सनातन की रक्षा और सनातन परंपराओं हेतु युद्ध लड़ते हुए शहीद हुए।
यह बात विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) ने बुरहानपुर में भगवान बिरसा मुंडा की 15वीं जयंती वर्ष के समापन अवसर 15 नवंबर ‘‘जनजातीय गौरव दिवस‘‘ को आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि भारत माता की गोद में पलने वाली जनजातीय परंपरा देश की प्राचीनता का प्रमाण है. जनजातीय समाज की प्रकृति केंद्रित जीवन व्यवस्था सनातन चरित्र की जीवंत अभिव्यक्ति भी है। इस सनातन चरित्र पर जब भी अतिक्रमण का प्रयास हुआ, तो जनजातीय समाज स्वधर्म, संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा के लिए खड़ा हो गया. इसी जनजातीय सभ्यता के तारे (धरती आबा) भगवान बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर, 1875 को हुआ था। इस दिन को भारत में जनजातीय ‘‘गौरव दिवस‘‘ के रूप में मनाया जाता है।
श्रीमती चिटनिस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 10 नवंबर, 2021 की कैबिनेट बैठक में भगवान बिरसा मुंडा की जन्म जयंती को ‘‘जनजातीय गौरव दिवस‘‘ के रूप में मनाने की घोषणा की। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर केंद्र सरकार जनजातीय नायकों के पराक्रम, दूरदर्शिता और योगदान को याद करने के लिए 1-15 नवंबर तक जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा मना रही है। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती मनाते हुए भारतीय समाज धरती आबा के स्वतंत्रता संघर्ष को याद करता है। समाज अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना को नमन करता है। इसी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना की रक्षा के लिए भगवान बिरसा मुंडा ने 25 साल की आयु में अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया था। भगवान बिरसा मुंडा अंग्रेजी हुकूमत और मिशनरियों के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह करने वाले अग्रणी नायकों में से हैं। भगवान बिरसा मुंडा का संघर्ष सिर्फ जमीन का संघर्ष नहीं था, अपितु यह स्वधर्म की रक्षा और सनातन चेतना की रक्षा का युद्ध था. जब भारत में मतांतरण की शक्तियां मजबूत थीं और जनजातीय समाज को मतांतरित कर रही थीं, तो भगवान बिरसा मुंडा ने अपनी सनातन जड़ों को मजबूत करने की जिम्मेदारी उठाकर परकीय समाज को सबक सिखाया।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि जब भारत अपने अमृत काल की ओर अग्रसर है, उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में ‘‘जनजातीय गौरव दिवस‘‘ और ‘‘जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा‘‘ मनाया जाना यह प्रदर्शित करता है कि सरकार धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के स्वप्न को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में भी जनजातीय कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार के साथ एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय के निर्माण को प्रदेश में गति प्रदान कर रही है।
अर्चना चिटनिस ने जनजातीय बंधुओं के साथ लोकनृत्य कर किया उत्साहवर्धन
इस अवसर पर कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संबोधन का सजीव प्रसारण भी किया गया। जनजातीय नृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और आकर्षक झांकियां विशेष आकर्षण का केन्द्र रही। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने जनजातीय नृत्य, संगीत और कथात्मक रंगमंच का एक भावपूर्ण मिश्रण प्रस्तुत किया। प्रत्येक प्रस्तुति क्षेत्रीय परंपराओं से प्रेरित थी और भारत के जनजातीय समुदायों की सामूहिक शक्ति, उदारता और कलात्मकता का प्रतीक थी। मंच पर ढोल की थाप और लोकनृत्यों की लय ने दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर कर दिया। स्थानीय जनजातीय कलाकारों, छात्र-छात्राओं, जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक साथ लोकनृत्य की आकर्षक और मनोहारी प्रस्तुति देकर समारोह को भव्यता प्रदान की। इस ऐतिहासिक अवसर पर विधायक श्रीमती अर्चना चिटनिस ने भी जनजातीय बंधुओं के साथ लोकनृत्य कर उनका उत्साहवर्धन किया। जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों, परंपराओं, जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत पर केंद्रित प्रदर्शनियाँ भी लगाई गई। इनमें बिरसा मुंडा सहित विभिन्न जनजातीय नायकों के योगदान, बलिदान और प्रेरणादायी प्रसंगों को विशेष रूप से प्रदर्शित किया। इस अवसर पर जनजाती समाज के गणमान्यजन, अधिकारियों, विद्यार्थियों एवं कलाकारों का शाल, बिरसा मुंडा का प्रतिक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर कार्यक्रम में कलेक्टर हर्षसिंह, महापौर श्रीमती माधुरी अतुल पटेल, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ.मनोज माने, गोपालसिंह मुजाल्दा, प्रो.कृष्णा मोरे, शीषपाल गुर्जर, अपर कलेक्टर वीरसिंह चौहान, जिला पंचायत उपाध्यक्ष गजानन महाजन, शाहपुर नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि वीरेन्द्र तिवारी, जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रदीप पाटिल, मनोज लधवे, सुभानसिंह चौहान, प्रशांत पाटिल, चिंतामन महानज, बलराज नावानी, किशोर पाटिल, योगेश महाजन, गजेन्द्र पाटिल, चिंटू राठौर, दीपक महाजन, आकाश राखुंडे, आशीष शुक्ला, धनराज महाजन, संभाजीराव सगरे, अशोक महाजन, मनोज फुलवानी, अरूण सूर्ववंशी, रूद्रेश्वर एंडोले, ईश्वर चौहान, दीवाकर कोली, गफ्फार मंसूरी एवं फिरोज तड़वी सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी एवं नागरिकगण उपस्थित रहे।

दिनांक:- 15 नवंबर 2025
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