बुरहानपुर: सत्संग में श्री आदित्य भाई ने दिया अनुशासन और सोच का संदेश, नंद महोत्सव पर उमड़े वैष्णव
बुरहानपुर। श्री आदित्य भाई ने अपने सत्संग में कहा कि जीवन में कुछ बातों से अनजान बने रहना ही अच्छा होता है, क्योंकि कभी-कभी सब कुछ जान लेना भी बहुत कष्ट देता है। उन्होंने कहा कि जैसी सोच भीतर चलती है, इंसान वैसा ही बनता है, इसलिए हमेशा अच्छा सोचिए और अच्छा बनिए।
श्री आदित्य भाई ने अनुशासन का महत्व समझाते हुए कहा कि चेहरे की झुर्रियां उम्रदराज होने का नहीं, बल्कि परिवार और प्रियजनों के लिए खर्च किए गए समय की अनमोल रसीद हैं। अनुशासनहीनता जीवन को पथभ्रष्ट कर देती है। पानी अनुशासनहीन हो तो बाढ़, हवा अनुशासनहीन हो तो आँधी और अग्नि अनुशासनहीन हो तो महाविनाश का कारण बन जाती है।
उन्होंने उदाहरण दिया कि नदी अनुशासन में बहकर सागर बन जाती है, बेल अनुशासन में बँधकर वृक्ष सी ऊँचाई पाती है और वायु अनुशासन में रहकर फूलों की सुगंध चारों दिशाओं में फैलाती है। जीवन भी अनुशासन में चले तो यात्रा का आनंद बढ़ जाता है। हमारी कोशिश यही होनी चाहिए कि हमारे कारण किसी का दिल न दुखे।
नंद महोत्सव और श्री वल्लभाचार्य जयंती के पावन पर्व पर बड़ी संख्या में वैष्णवों ने नंद महोत्सव का आनंद लिया।
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